Skip to main content

सच मे ही

सच मे मैं नहीं लिखती,यह मेरी लेखनी मुझसे
लिखवाती है।
जाने कितने ही सोए अहसासों को हौले से जागृत कर जाती है।।
           स्नेहप्रेमचंद

Comments