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चक्रव्यूह thought by snehoremchand

अपने ही रचते हैं चक्रव्यूह अपनों के लिए गैरों को तो पता ही क्या कि किसी अभिमन्यु को चक्रव्यूह
में जाने का मार्ग तो पता है पर चक्रव्यूह से बाहर जाने का नहीं।।
                      Snehpremchand

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