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क्रोध

क्रोध में अक्सर मन की बात जुबान पर है आ जाती।
सत्य का प्रतिबिंब होता है क्रोध कई बार,
बेहतर है सच्चाई खुद ही सामने आती।।
                   स्नेहप्रेमचंद





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