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सेवा संग मुस्कान,यही हमारी पहचान(( विचार स्नेह प्रेमचंद द्वारा))

*सेवा संग मुस्कान
यही निगन की पहचान*

*समाधान हेतु आगमन
संतुष्टि सहित प्रस्थान*

*आए जब भी प्रांगण में 
ग्राहक हमारे,
मिले उसे उसकी समस्या का समाधान*

*देकर त्वरित और त्रुटिरहित सेवा उसे
भरोसे,विश्वाश आश्वाशन का पाएं इनाम*

*ग्राहक है तो है संस्था हमारी महान*
*वो नहीं हम निर्भर हैं उस पर
इस सत्य से ना रहें अनजान*

*ग्राहक ही है सर्वोपरि 
दें जीवन में उसे यथोचित स्थान*

*समाधान हेतु आगमन,
संतुष्टि सहित प्रस्थान*

*सरल सहज आत्मीय वार्तालाप हो
संग ग्राहक के,
उसकी जरूरतों से न रहें अनजान*

*जिस काम के लिए आए वो प्रांगण में हमारे,
सिद्धि का उसे मिले प्रावधान*

*समाधान हेतु आगमन,संतुष्टि सहित प्रस्थान*

*नई चुनौतियां,नए संकल्प हैं आज के समय में समक्ष हमारे*
*छीन ना ले कोई हमारे ग्राहक को,
आए बार बार वो हमारे द्वारे*

*इसी संकल्प को धार कर हम,
हर चुनौती को करें आसान*
*सेवा संग मुस्कान
यही निगम की सच्ची पहचान*
*समाधान हेतु आगमन
संतुष्टि सहित प्रस्थान*



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