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संबंध नहीं मुरझाते कभी गर कायम रहे संवाद* (( विचार स्नेह प्रेमचंद द्वारा))

*संबंध नहीं मुरझाते कभी
गर कायम रहे संवाद*

*एक ही तो है एल आई सी सर्वत्र सर्वदा,
हिसार हो या फिर हो फतेहबाद*

*सुमन में तो खुशबू होती ही है,
बस कर लेना हमें कभी कभी याद*

 *यही दुआ है पूरी शाखा हिसार की,सदा खुश रहना और होना आबाद
हंसते हंसते कट जाएं रस्ते,
पनपे ना चित में कभी अवसाद*

*मन मलिन न हो, राहें जटिल न हों
हो ना कोई परेशानी,कष्ट,क्लेश,विषाद*

*स्नेह भरा हो सफर आपका,
हो ना जीवन में बाद विवाद*

*खूब अच्छा काम किया,
आगे भी करना,
अपनी पैरेंटल शाखा को रखना सदा याद*

*संबंध नहीं मुरझाते कभी, 
गर कायम रहे संवाद*
*खूब तरक्की करना जीवन में,
यही ईश्वर से फरियाद*


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