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अनुकरणीय है जीवन राम का(( स्तुति स्नेह प्रेमचंद द्वारा राघव गाथा अंश))

आती जाती सांस में हो राम का नाम(( स्तुति स्नेह प्रेमचंद राघव गाथा अंश))

राघव गाथा

सीता राम(( स्तुति स्नेह प्रेमचंद द्वारा))

चित की बंजर भूमि को फिर से उपजाऊ बनाना होगा(( स्तुति स्नेह प्रेमचंद द्वारा राघव गाथा का एक अंश))

राम तुम्हें फिर आना होगा(( स्तुति स्नेह प्रेमचंद द्वारा राघव गाथा का एक अंश))

सौहार्द का रामसेतु तुम्हें बनाना होगा(( स्तुति स्नेह प्रेमचंद द्वारा अंश राघव गाथा से))