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गगन सी छूना सदा ऊंचाई(( दुआ स्नेह प्रेमचंद द्वारा))

ग== गन सी छूना ऊंचाई जीवन में,
आए ना कभी पतझड़,रहे सदा बसंत बहार

ग== म न दें दस्तक कभी जिंदगी की चौखट पर,खुशियों के आजीवन हों दीदार

न== यन देखें सदा सपने बड़े,
पनपे ना चित में कभी विकार

मैं ही नहीं,
ये दुआ दे रहा पूरा
*हमारा प्यार हिसार परिवार*

सौ बात की एक बात है
*प्रेम ही हर रिश्ते का आधार*
*कुछ कर दरगुजर,
कुछ कर दरकिनार*

यही मूल मंत्र है जीवन का,
*करना इस सत्य को स्वीकार*

कर्म ही असली परिचय पत्र होते हैं व्यक्ति का,
वरना एक ही नाम के व्यक्ति होते हैं हजार

*धरा सा धीरज,उड़ान गगन सी*
जीवन पथ का तूं हीं होता रहे विस्तार
*बधाई बधाई लाख बधाई*
खुश रहो आप और आपका पूरा परिवार।।

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