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प्रेम ना जाने मजहब कोई(( दुआ बुआ स्नेह प्रेमचंद द्वारा))


*प्रेम ना जाने मजहब कोई,
जाने ना प्रेम कोई 
जाति,भाषा,देस की दीवार*

*प्रेम तो दस्तक है दिल की
 दिल पर,
प्रेम ही हर रिश्ते का आधार*

*एक दुआ है ईश्वर से आज
जीवन में मिलें खुशियां अपार*

*प्रेम चमन में अंकुर प्रेम के ही उगते हैं
प्रेम से सुंदर हो जाता है संसार*

*आज जन्मदिन पर आपके
देता है दिल यही उपहार*

*मतभेद बेशक हो जाए पर मनभेद ना हो कभी,
आए ना चित में कोई विकार*

*प्रेम से पहले आता सम्मान है
हो ना रेखा ये कभी पार*
 GOD BLESS YOU DEAR 

Comments

  1. प्रेम की परिभाषा बताने वाली उत्कृष्ट कृति 🎀🫶

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  2. शुक्रिया जिया

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