Skip to main content

खुशी नहीं मिलती बाहर से(( विचार स्नेह प्रेमचंद द्वारा))

*खुशी नहीं मिलती बाहर से
खुशी है भीतर का अहसास*

*कोई तो कुटिया में भी खुश है
किसी को महल भी नहीं आते रास*

"सकारात्मक सोच से ही जीवन मे
आती हैं खुशियां और उल्लास*

*लेने में नहीं देने में मिलती है सच्ची खुशी,
बस निर्मलता का हो चित में वास*

*एक बात बस रहे जेहन में
प्रलाप से बेहतर सदा ही होते हैं प्रयास*

Comments

Post a Comment