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नहीं मात्र हनुमान के

प्रेम विश्वास है,विश्वासघात नहीं(( विचार स्नेह प्रेमचंद द्वारा))

*प्रेम अहसास है  अभिव्यक्ति नहीं* *प्रेम विश्वास है विश्वासघात नहीं* *प्रेम समर्पण है विरक्ति नहीं* *प्रेम स्वेच्छा जानता है, इच्छाओं का पाश नहीं* *प्रेम परवाह है उपेक्षा नहीं* *प्रेम दर्पण है सच्चे समर्पण का, प्रेम मूल्य है कोई वस्तु नहीं* *प्रेम के पौधे को अपनत्व की धूप,परवाह का पानी और सहयोग और विश्वाश की हवा चाहिए अच्छे से पनपने के लिए,प्रेम अध्यात्म है,भौतिकता नहीं* *प्रेम मन के विज्ञान को जानना है,तन के भूगोल को नहीं* *प्रेम सम्मान है अपमान नहीं* *प्रेम की परिधि व्यास क्षेत्रफल सब प्रेममय है,१२ माह नेह की बारिश होती है,प्रेम मधुरता का बसन्त है,घृणा का पतझड़ नहीं* *प्रेम स्वतंत्रता है, स्वछंदता नहीं" *प्रेम आत्मा का  सच्चा सोलह श्रृंगार है, तन का सार नहीं* *प्रेम समर्पण,सम्मान,सहयोग का सच्चा मित्र है,काम अहंकार का नहीं* *प्रेम तो वह पारस है जो पत्थर को भी सोना बना दे,प्रेम निखार है,बिखराव नहीं* *प्रेम के सुर प्रेम की सरगम अनहद नाद बजाते हैं,प्रेम दिल पर दस्तक,जेहन में बसेरा और चित पर पक्के निशान छोड़ता है,प्रेम ऐसा रंगरेज़ है जो अपने पक्के रंग से रूह रंग जाता है,प्रेम में ...

करवाचौथ पर सबसे बेहतर उपहार

ऐसी दृष्टि दो मुझे रामा

एक संकल्प जो धरा था चित में

हे राम इसे तुम साधोगे( अरदास स्नेह प्रेमचंद द्वारा)

ऐसी दृष्टि दो मुझे रामा(( अरदास स्नेह प्रेमचंद द्वारा राघव गाथा अंश))