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चित चेतना चितवन चेतन अचेतन चित्र चरित्र चेष्टाओं में बस हो हर पल मेरे राम(( स्तुति स्नेह प्रेमचंद द्वारा राघव गाथा अंश))

*चित,चेतन,चितवन,चेतन,अचेतन, चित्र,चरित्र,चेष्टाओं में हर पल बस हों मेरे राम* *हिवडा मेरा बस यही चाहे,हो रसना पर राम का नाम* *जब कोई सहारा न आए नजर,तब राह दिखाते हैं श्री राम* *मलिन मनों से धुंध कुहासे पल भर मे हटा देते हैं श्री राम* *हर दुविधा को सुविधा बनाते हैं श्री राम* *अग्निपथ से इस जीवन को सहज पथ बना देते हैं श्री राम* *जब चहुं ओर घना अंधेरा छा जाए,आस दीप जला देते हैं श्री राम" *जब किसी भंवर में फंस जाएं तब हौले से बाहर ले आते हैं श्री राम* *बिखरने लगते हैं जब जीवन के किसी संघर्ष से, तब हिम्मत बंधा देते हैं श्री राम* *जब किसी चक्रव्यूह से बाहर आने में सक्षम न हों, तब बाहर लाते हैं श्री राम* "आहत मन को राहत देते, हर दुविधा को सुविधा बनाते हैं  श्री राम* *हमसे हमारा परिचय करवा कर हमारी सुप्त शक्तियों को जगा हमें बेहतर इंसान बनाते श्री राम* *हर चुनौती को अवसर बनाते  रघुपति राघव राजा राम" *कभी ना कोसते अपने भाग्य को, कर्मों से भाग्य संवारते राम* *शत्रु भी हो ज्ञानी तो भाई लक्ष्मण को  उस से ज्ञान लेने की प्रेरणा देते राम* *सहयोग ही सच्चा कर्मयोग है पग पग पर समझाते राम* ...