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Thought on parents by sneh premchand

ज़रा सोचिए,,,,,,माँ बाप बच्चों को भुला कर सामान्य और सहज जीवन नही जी पाते,फिर उनके ही बच्चे उनको वृद्धा आश्रम में छोड़ कर कैसे सहज और सामान्य जीवन जी लेते हैं, अंतरात्मा इतनी कैसे सो सकती है?

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