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Thought on life by sneh premchand

उलझी उलझी सी इस ज़िन्दगी के ताने बानो को,खुद ही हमें सुलझाना है।
हर अर्जुन को लड़ना पड़ता है खुद ही
महाभारत अपना,
है शाश्वत सत्य,नहीं कोई झूठा फ़साना है।।
           स्नेह प्रेमचंद

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