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Thought on heart by sneh premchand

दिल बड़े हो घर छोटा हो चलेगा,
 पर घर बड़ा हो दिल छोटा हो कतई नहीं चलेगा।।
 घर घरवालों से होता है दरो दीवार से नहीं,
प्रेम से मधुर बनते हैं रिश्ते तकरार से नहीं।।
      स्नेह प्रेमचंद

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