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Thought on mother by sneh premchand

आधी जागी, आधी सोई
थकी दोपहरी जैसी माँ।

कुछ न कुछ हर पल वो करती
सब कुछ करने जैसी माँ।

ममता के मटके को 
ममता के मनको से
हर पल भरती जैसी माँ।

चिमटा,बर्तन,झाड़ू,लत्ते
धोती, कभी नही थी थकती माँ।

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