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शफ़क thought by sneh premchand

मानो बहुत कुछ कहना चाहती है ये शफक बिन लफ़्ज़ों का इस्तेमाल किए।
 बिन दीवाली ही जला दिए हो जैसे किसी ने दिवाली के अगणित से दीए।।
           स्नेह प्रेमचंद

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