Poem on mother by sneh premchand July 13, 2020 वो थकती नही,वो रुकती नही,ये मा की होती है पहचान।एक अक्षर के छोटे से शब्द में,सिमटा हुआ है पूरा जहांन।।न कोई था,न कोई है,न कोई होगा,मा से बढ़ कर कभी महान।।मां होने से धरा पर ही बन जाता है स्वर्गमां कुदरत का अनमोल वरदान।। स्नेह प्रेमचंद Share Get link Facebook X Pinterest Email Other Apps Labels वरदान Share Get link Facebook X Pinterest Email Other Apps Comments
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