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Poem on mother by sneh premchand

वो थकती नही,वो रुकती नही,
ये मा की होती है पहचान।
एक अक्षर के छोटे से शब्द में,
सिमटा हुआ है पूरा जहांन।।
न कोई था,न कोई है,न कोई होगा,
मा से बढ़ कर कभी महान।।
मां होने से धरा पर ही बन जाता है स्वर्ग
मां कुदरत का अनमोल वरदान।।
      स्नेह प्रेमचंद

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