इस परिवर्तनशील संसार मे कुछ भी स्थाई नही है,न सुख,न दुख,न समस्याएं,न खुशियाँ।फिर हम क्यों ऐसा सोचते हैं जैसे कुछ बदलेगा ही नही।परिवर्तन अवश्यंभावी है।जब दिन के पहर एक जैसे नहीं,बरस के मौसम एक जैसे नहीं,तन मन की अवस्था एक सी नहीं,रिश्तों के स्वरूप एक से नहीं,फिर सब एक सा कैसे रह सकता है।।
Comments
Post a Comment