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Poem of world परिवर्तन by sneh premchand

इस परिवर्तनशील संसार मे कुछ भी स्थाई नही है,न सुख,न दुख,न समस्याएं,न खुशियाँ।फिर हम क्यों ऐसा सोचते हैं जैसे कुछ बदलेगा ही नही।परिवर्तन अवश्यंभावी है।जब दिन के पहर एक जैसे नहीं,बरस के मौसम एक जैसे नहीं,तन मन की अवस्था एक सी नहीं,रिश्तों के स्वरूप एक से नहीं,फिर सब एक सा कैसे रह सकता है।।
       स्नेह प्रेमचंद

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