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World Book day special ((सच्ची मित्र हैं किताबें))

पुस्तकालय सा सच में 
नहीं होता कोई भी धनवान।
जरा दस्तक तो दो
 इसकी चौखट पर,
किवाड़ खोलने
 आ जाएगा ज्ञान।।

जाने कितने ही एहसासों को अभियक्ति का मिलता है पुस्तकों में  इनाम।
ये किताबें ही तो हैं जो हटा तमस,
उजियारे का देती हैं वरदान।।

**दशा और दिशा देती हैं किताबें**
**सच्ची मित्र,सलाहकार और मार्गदर्शक होती हैं किताबें**
**नजर और नजरिया दोनो ही बदल देती हैं किताबें**
**ज्ञान की अलख जला तमस हर लेती हैं किताबें**
**विचार परिवर्तन और हृदय  परिवर्तन कर देती हैं किताबें**
**सोच कर्म परिणाम की त्रिवेणी बहा देती हैं किताबें**
**शिक्षा को संस्कार से मिला देती हैं किताबें**
**फर्श से अर्श तक पहुंचा देती हैं किताबें**
**आर्थिक,बौद्धिक और शारीरिक क्षमता का पूर्णतया विकास करती हैं किताबें**
**जिंदगी के सफर को आसान कर मंजिल तक पहुंचा देती हैं किताबें*"
**एहसासों को अभिव्यक्ति दे देती हैं किताबें**
**इतिहास को संजो कर वर्तमान को सुखद बना भविष्य को उज्जवल बना देती हैं किताबें"*
**दिलो दिमाग के बंद किवाड़ पर सतत दस्तक देती रहती हैं किताबें**
**विचारों के मंथन के बाद निकले अमृत का मजबूत सा कलश हैं किताबें**

**फर्श से अर्श तक का सफर कर सकता है इंसान बिन खास व्यवधान**
**हिमालय भी पड जाता है छोटा इनके आगे**
ऐसा होता है किताबों में संग्रहित ज्ञान।।
**नहीं पढ़ते जो लोग किताबें,
सच में होते हैं वे नादान**

जा कर भी कभी कहीं नहीं जाते लेखक,
सच में हमारी अनमोल विरासत हैं ऐसे विद्वान।।

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