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फिक्र किस बात की(( विचार स्नेह प्रेमचंद द्वारा))

जब एल आई सी है साथ हमारे
फिर फिक्र की क्या है बात???
हर धूप छांव में संग खड़ी है
भरोसे और आशा की देती सौगात

सुरक्षा,संरक्षा और संवृद्धि
तीनों ही शक्ति स्तंभ देते हैं साथ
जिंदगी के साथ भी 
जिंदगी के बाद भी
देते हैं सहारा एल आई सी के हाथ

साथ ना छुटे,आस ना टूटे
चाहे कैसे भी हों विषम हालात
जब एल आई सी है साथ हमारे
फिर फिक्र की क्या है बात????

अनेक उत्पाद दामन में समेटे
 उपलब्ध है हर वर्ग  की आवश्यकतानुसार
हर पॉकेट में हों विभिन्न पॉलिसी
जोखिम से सुरक्षा की आवश्यकता बीमे का होती आधार
आवश्यक बचत हो जाती है
आर्थिक संबल के कंबल को ओढ़ने की मिलती सौगात
जब एल आई सी है साथ हमारे
फिर फिक्र की क्या है बात?????

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