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क्या अंजु से कभी बन पाओगे(( प्रश्न और श्रद्धांजलि स्नेह प्रेमचंद द्वारा))


*अंजु अंजु*करते हो तुम,
क्या अंजु से कभी बन पाओगे??

उतनी समझ,स्नेह,विनम्रता,ज्ञान
कहो कहां से लाओगे??

प्रीत की रीत निभाई सदा उसने
क्या तुम भी निभा उसे पाओगे??
अंजु अंजु======कभी बन पाओगे??

परमार्थ की राह चुनी उसने,
क्या सच में तुम भी चुन पाओगे??
जहां स्वार्थ की धूप खिलेगी,
तुम तत्क्षण ही मुड़ जाओगे

पग पग पर जिंदगी लेती रही परीक्षा
क्या ऐसी परीक्षा तुम दे पाओगे???

परिस्थित को हावी न होने दिया मनःस्थिति पर,
क्या तुम भी ऐसा कर पाओगे???

सदा रही मर्यादित बहना
क्या तुम मर्यादित रह पाओगे

*साधन संसाधन*भले ही कम रहे आरंभिक जीवन में,
क्या फिर भी उसके जैसी सच्ची साधना कर पाओगे???

किसी अभाव का प्रभाव न होने दिया लक्ष्य प्राप्ति पर,
क्या अभावग्रस्त हो कर उसके जैसा लक्ष्य साध तुम पाओगे??

विषम परिस्थितियों में भी न छोड़ा आशा का दामन,
क्या उसके जैसे संकल्प को सिद्धि से मिला तुम पाओगे???

भले ही शूल रहे हों जीवन पथ पर,क्या फिर भी उसके जैसे सुमन से खिल पाओगे???

*सद्गुण* बन गए थे मित्र उसके, विकारों से नहीं कोई नाता था, कितना भी बड़ा हो कोई भी प्रलोभन,मां जाई को कभी नहीं लुभाता था,
भौतिकता की इस चकाचौंध से क्या उसके जैसे 
अध्यात्म के मार्ग पर जा पाओगे????

*सहयोग ही सच्चा कर्मयोग है*
क्या उसके जैसे इसे जीवन का मूल मंत्र बनाओगे??

धरा पर रह कर भी छू लिया था आकाश उसने,
क्या सच में तुम भी ऐसा कर पाओगे????

हर नाते में भर दिया रंग प्रेम का
 *प्रेम सुता* ने,
क्या तुम भी ऐसे नातों को निभा पाओगे????

जो सोचा वही कर डाला उसने,
क्या सोच,कर्म,परिणाम की त्रिवेणी उसके जैसी बहा तुम पाओगे???

किसी बाधा को बनने ना दिया बाधक उसने,
क्या इतना हौंसला कहीं से ला पाओगे????

अत्यंत तेजस्विता के बाद भी
 परम विनम्रता की रही स्वामिनी,
क्या तुम भी कभी ऐसे बन पाओगे???

अहंकार नहीं था 
चित में कभी उसके,
क्या ऐसे अपने चित को
 मंदिर तुम बना पाओगे???
*अंजु अंजु* करते हो,
पर क्या अंजु से 
कभी बन पाओगे???

बच्चों में बच्चों सी,
बड़ों में बड़ी सी
क्या तुम ऐसे बन पाओगे???
क्रिया की कैसे करते हैं प्रतिक्रिया,
देख उसकी प्रतिक्रिया सब समझ तुम जाओगे,
कभी उद्वेलित नहीं होती थी लाडली,
क्या तुम ऐसी प्रतिक्रिया दे पाओगे???

परिवेश परवरिश को ना कभी कोसा उसने,
क्या तुम ऐसे कर पाओगे???
कर्म का बजाया सदा ही अनहद नाद उसने,क्या तुम भी बजा उसे पाओगे???

*भगति में होती है शक्ति*
क्या उतनी श्रद्धा से भगति कर पाओगे???

एक सच्ची*हनुमान भगत*रही सदा वह,
क्या भाव हिया में वैसा भर पाओगे???

*निरस्त नहीं दुरुस्त*किया उसने सदा हर नाते को,क्या तुम नातों को उसके जैसे सींच सा पाओगे???

परदेस में बना लिया परदेसियों को भी अपना,
क्या उसके जैसा कनेक्टिविटी का गुण अपने चित में लाओगे???

किसी की वाणी अच्छी होती है,किसी का ज्ञान अच्छा होता है और किसी का अच्छा होता है व्यवहार,
तीनों ही उम्दा रहे जिसके नाम है उसका *अंजु कुमार*
बहती रही ताउम्र उसके चित में यह त्रिवेणी,
क्या तुम एक भी गुण अपने भीतर ले आओगे????

बच्चों को भी बड़े प्रेम से हर बात वह समझाती थी,बच्चों के स्तर पर खुद उतर कर बच्चों जैसी हो जाती थी,हर कॉन्सेप्ट कर क्लियर मन के पटल से सारे धुंध कुहासे हटाती थी,कोई राग ना था,कोई द्वेष ना था,वह पल पल चित को निर्मल बनाती थी,एक बार जरा सोच कर देखो,क्या खुद को वैसा बना तुम पाओगे???

नयन और मुख पढ़ लेती थी वह,
क्या तुम भी वैसे पढ़ पाओगे??

मित्रों में मित्र उसे तो 
सच में कहूँगी मैं *कोहिनूर"

दिल से जुड़ जाती थी मित्रों से,
कर देती थी उनकी समस्याएं सब दूर

उसका हृदय बात करता था मित्र हृदय से,
क्या तुम ऐसे मित्र कभी बन पाओगे???

आसान नहीं था अंजु होना,बहुत हलचल होते हुए भी सहज रहना
सच बताना खंगाल कर खुद को,
क्या ऐसे बन पाओगे

कहती नहीं वह चुपके से कर देती थी
उसके शब्द नहीं उसके कर्म बोलते थे
करुणा चित में,ज्ञान दिमाग में,विनम्रता व्यवहार में,मधुर बोली लबों पर रहती थी सदा उसके,क्या तुम भी वैसा कर पाओगे???

एक भी गुण गर अपना लिया उसका,
सच जीवन सफल बनाओगे
प्रेरणा है अंजु का जीवन हम सबके लिए,क्या तुम भी उससे प्रेरित हो जाओगे???

दैहिक रूप से भले ही आज नहीं है वह संग हमारे,पर जिंदा हैं आज भी विचार उसके,क्या तुम उसे भुला कभी पाओगे????
               शायद कभी नहीं

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