Skip to main content

शत शत नमन और वंदन आपको(( A tribute to pandit Ram parsad Bismil,Ashfak ulla Khan and Thakur Roshan Singh Great Hero Of Kakori Kand))

शत शत नमन और वंदन आपको,
जग नहीं भूलेगा कभी शहादत आपकी,
अमर हो गए आप तीनों बलिदानी।
युग आएंगे,युग जाएंगे,पीढियां सुनेगी आपके शौर्य वीरता की अद्भुत कहानी।।

देश सेवा में पूर्ण जीवन समर्पित करने वाले,
आप सच में ही थे महान क्रांतिकारी।
क्रांति की ऐसी अलख जला दी,
शोला बन गई चिंगारी।।
*शुक्रिया * शब्द बहुत छोटा है आप सरीखे लोगों के लिए,
नतमस्तक हो जाती है कायनात  ये सारी।।

*काकोरी काण्ड* के तीन महानायक थे अति महान।
*पंडित राम प्रसाद बिस्मिल,ठाकुर रोशन सिंह और अशफाक उल्ला खान ।।
 आज ही के रोज तो दिया था आपने बलिदान।

कृतज्ञ है राष्ट्र आप तीनों के लिए ही,
है कर्तव्य हमारा, न रहे आप की शौर्य गाथा से कोई अंजान।।
19 दिसंबर एक ऐतिहासिक तिथि है,
मां भारती के लाल आज के ही रोज मां की रक्षा हेतु हुए थे कुर्बान।।
शत शत नमन और वंदन आपको,
याद रखेगा आपको सारा जहान।।
        स्नेह प्रेमचंद

Comments

Popular posts from this blog

वही मित्र है((विचार स्नेह प्रेमचंद द्वारा))

कह सकें हम जिनसे बातें दिल की, वही मित्र है। जो हमारे गुण और अवगुण दोनों से ही परिचित होते हैं, वही मित्र हैं। जहां औपचारिकता की कोई जरूरत नहीं होती,वहां मित्र हैं।। जाति, धर्म, रंगभेद, प्रांत, शहर,देश,आयु,हर सरहद से जो पार खड़े हैं वही मित्र हैं।। *कुछ कर दरगुजर कुछ कर दरकिनार* यही होता है सच्ची मित्रता का आधार।। मान है मित्रता,और है मनुहार। स्नेह है मित्रता,और है सच्चा दुलार। नाता नहीं बेशक ये खून का, पर है मित्रता अपनेपन का सार।। छोटी छोटी बातों का मित्र कभी बुरा नहीं मानते। क्योंकि कैसा है मित्र उनका, ये बखूबी हैं जानते।। मित्रता जरूरी नहीं एक जैसे व्यक्तित्व के लोगों में ही हो, कान्हा और सुदामा की मित्रता इसका सटीक उदाहरण है। राम और सुग्रीव की मित्रता भी विचारणीय है।। हर भाव जिससे हम साझा कर सकें और मन यह ना सोचें कि यह बताने से मित्र क्या सोचेगा?? वही मित्र है।। बाज़ औकात, मित्र हमारे भविष्य के बारे में भी हम से बेहतर जान लेते हैं। सबसे पहली मित्र,सबसे प्यारी मित्र मां होती है,किसी भी सच्चे और गहरे नाते की पहली शर्त मित्र होना है।। मित्र मजाक ज़रूर करते हैं,परंतु कटाक...

महिला(( नारी शक्ति पर बेहतरीन कविता स्नेह प्रेमचंद द्वारा))

मजबूत हौंसला,बुलंद इरादे, आज की महिला की यही पहचान दिल पर दस्तक,दिमाग में बसेरा चित में इसके पक्के निशान महिला ही तो देती है जन्म सृष्टि को सच में ईश्वर का धरा पर है वरदान अपनी जान पर खेल हमें जगत में लाने वाली के लिए बहुत छोटा है शब्द महान जीवन की डगर आसान नहीं किसी भी महिला की, संकल्प से सिद्धि तक के सफर में कितने ही आते हैं व्यवधान पर वो रुकती नहीं है,चलती रहती है बेशक जानती नहीं परिणाम  अपने ही पर्याय को उतार   धरा पर बेफिक्र सा हो गया भगवान खास नहीं अति खास मूढ में रहा होगा  विधाता,  जब नारी का किया होगा निर्माण आज कोई भी क्षेत्र नहीं अछूता नारी शक्ति से, हर क्षेत्र में नारी ने बना ली है पहचान दिल दिमाग में सामंजस्य बिठाना आता है नारी को, सदा ऋणी रहेगा नारी का ये जहान 

बुआ भतीजी