चित्रकूट की शिला पे बैठे
रोते भरत से बोले राम
इतने दुखी तुम क्यों हो भाई??
कैसे आऊं तेरे काम___२
(कैसे करूं मैं तेरे काम)
रुंधे कंठ से बोले भरत फिर
*लांछन लाग्यो मुझ पर राम*
किया नहीं था पाप जो मैंने
भुगत रहा उसके परिणाम*****२
चित्रकूट की शिला पे बैठे
रोते भरत से बोले राम
देख सकूं न तुझे मैं रोते
आऊँ कैसे तेरे काम????
बोले भरत फिर रूंधे गले से
मेरी कहानी सुन लो राम
कैसे सुनाऊँ पाती दिल की
चैन ना आए सुबह ओ शाम***२
छाया हटी भाई जब से तोरी
लागे मोहे घणा घना घाम
अवध के इस संकट का कारण
मुझे समझते भाई राम
कैसे धोऊं इस पाप कलंक को
हिवडा मेरा रहा ना जान****२
चित्रकूट की शिला पे बैठे
रोते भरत से बोले राम
सजल करो न नयन तुम्हारे____२
तुझ में बसते मेरे प्राण
हृदय से लगाया भरत को राम ने
धीरज देने का कर गए काम
सुनों भरत मेरे प्यारे भाई!
देता तुझे हूं सच्चा ज्ञान
सहेज के रखना,समेट के रखना
जानू मैं,तू नहीं नादान
धूल जमे गर दर्पण पर तो
निर्मल चित न करे भुगतान
देखे ऊपर ऊपर से जग
अंतर्मन की ना पहचान
चित्रकूट की शिला पे बैठे
रोते भरत से बोले राम
मैं हूं तो तू काहे रोये
अंबर धरा तुझ पर कुर्बान
पौंछ ले आँसू प्यारे भाई
सच में तू तो है मेरी जान
देख तुझे मैं बतलाता हूं
मान ले इसको सच्चा ज्ञान
चित निर्मल तो कण कण तीर्थ
चित निर्मल तो कण कण धाम
चित्रकूट की शिला पे बैठे
रोते भरत से बोले राम
भरत सा भाई कहीं ना मिलेगा
है मुझको तेरी पहचान
सच जाने तेरी अंतरात्मा
और सच जाने है भगवान
कोई पाप लोभ नहीं चित में तेरे
फिर देना नहीं कोई प्रमाण
चित्रकूट ____
काम है लोगों का कहना
यूं ही कहता रहेगा सारा जहां
सच्ची भक्ति दिल में तेरे
मैं जानू तेरे चित का विज्ञान
जो गलती नहीं की कभी तूने
तू भुगत रहा उसका परिणाम
कोई कैसे लांछन तुझ पर
तेरा चित पावन तेरा पावन काम
साची भक्ति करे तू भी
सच में तू है चरित्रवान
भाई भरत ना कर तू चित भारी
सब जानेंगे है तू कितना महान
चित्रकूट की शिला पे बैठे
रोते भरत से बोले राम
देख सकूं ना तुझे मैं रोते
मेरा भाई मेरी जान
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