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फिर स्मरण करो निज शक्ति का((स्तुति स्नेह प्रेमचंद द्वारा राघव गाथा अंश))

*फिर स्मरण करो निज शक्ति का*
आ जाओ ना बजरंगी फिर एक बार
फिर से ला दो कोई संजीवनी बूटी,
होश में भी लागे मूर्छित सारा संसार

*बल,बुद्धि,विद्या देहु मोहि
हरहु क्लेश विकार*
कर जोड़ सब कर रहे विनती
पवन पुत्र इसे करो स्वीकार
फिर स्मरण करो निज शक्ति का
आ जाओ ना बजरंगी फिर एक बार*

इस जग में हनुमान तो बहुत हैं
पर उन हनुमानों को जगाने वाले जामवंत पल पल हो रहे हैं कम,
हो ऐसे जामवंतों का जन्म बार बार

क्षमताओं का हो पूर्ण रूप से दोहन
सत्कर्म बनें मानव जाति का सच्चा अलंकार
फिर स्मरण करो निज शक्ति का बजरंगी,
आ जाओ ना फिर एक बार 

संस्कारों का जिंदगी के भाल पर 
टीका नहीं है
*सो गए हैं जैसे सारे संस्कार*
दो दस्तक उनकी चौखट पर,
सोच कर्म परिणाम की त्रिवेणी बहा दो ना फिर इस बार

*पूरे जब में उथल पुथल है
चहुं ओर है हाहाकार*
सच में बजरंगी हो आप ज्ञान गुण सागर,
कर दो सबका बेड़ा पार

करते हैं जो दिल से मेहनत
हों उनके सपने साकार
फिर स्मरण करो निज शक्ति का,
आ जाओ ना बजरंगी फिर एक बार 

मिट जाती हैं पीड़ाएं सारी,
नाम आपका लेने से
आप सिखाते हो निज चरित्र से
सच्ची खुशी मिलती है खुशियां देने से,
गए लेने संजीवनी बूटी,
पूरा ही गिरी तुम ले आए
*रामप्रिय*मूर्छित लक्ष्मण के
 आप ने ही प्राण बचाए
जैसे उनके प्राण बचाए
करो आप हमें ही भव से पार
फिर स्मरण करो निज शक्ति का
करो पूरे जग का तुम उद्धार
कष्ट हरो सारी कायनात के कपीश्वर!
करो प्रेम और सत्कर्मों का संचार

*हो उदित भोर फिर आशा की,
मिटे नैराश्य का अंधकार*
*राम दुलारे* जग के प्यारे 
रहे ना चित में कोई अहंकार
रहे हृदय में जैसे राम के
करना हमारे चित में भी रहना स्वीकार
फिर स्मरण करो निज शक्ति का
आ जाओ बजरंगी फिर एक बार

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