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सुमिरन कर ले राम नाम का(( स्तुति स्नेह प्रेमचंद द्वारा राघव गाथा अंश))

*सुमिरन कर ले राम नाम का
जीवन सफल बनाएगा*
तेज में होगा*दिनकर*सा तू
चमक दमक सा जाएगा
सुमिरन कर ले राम नाम का,.
चित निर्मल हो जाएगा

शीतल होगा तू *चंद्र*सा
सब शीतल हो जाएगा
मोहक होगा तेरा मुखड़ा
*कामदेव*बन जाएगा
सुमिरन कर ले राम नाम का
जीवन सफल बनाएगा

ऐसा परिवर्तन होगा तुझमें
तू सोच सोच चकराएगा
मन की शुद्धि हो जाएगी
मन पावन हो जाएगा
हर राह सरल हो जाएगी
तेरा मन मंदिर बन जाएगा
सुमिरन करले राम नाम का
चित निर्मल हो जाएगा

सुख भोगेगा इंद्र से बंधु
हरिश्चंद्र बन जायेगा
आए चाहे जो भी बाधा
सत्य पथ अपनाएगा
ऐसी कृपा नाम राम की,
सारा समझ में आएगा
सुमिरन कर ले राम नाम का
अंधकार मिट जाएगा
मावस बन जाएगी पूनम
उजियारा मुस्काएगा

मान सम्मान में तू *गणेश* सा,
पल भर में बन जाएगा
अंतर्मन के गलियारों में,
राम नाम सुन पाएगा
लागी लागेगी राम नाम की,
कुछ और लगा नहीं पाएगा
*सुमिरन कर ले राम नाम का
जीवन धन्य हो जाएगा

लेगा जब भी नाम राम का,
चित पावन हो जाएगा
धरा पर रह कर सच में तू,
अम्बर को छू जाएगा
एक भी गुण तू राम जीवन का,
सच में तू अपनाएगा
क्यों आया था इस चोले में,
सत्य यह जान तू पाएगा
सुमिरन कर ले नाम राम का,
बजरंगी बन जाएगा

जैसे सिमरा बजरंगी ने
क्या तू भी सिमर इसे पाएगा??
आज अभी इसी पल से जप ले,
पल कोई ना लौट के आएगा
भोर शाम को सच में अपनी,
तू पावन कर जाएगा

जैसे सिमरा भीलनी ने
क्या वैसे सिमर तू पाएगा??
देंगे दर्शन श्री राम जी,
अलपक सा निहारे जाएगा
आह्लादित होगा चित तेरा,
मन राम राम फिर गाएगा
सुमिरन कर ले राम नाम का,
चित सोने सा हो जाएगा
जितना जपेगा उतना तपेगा
सोना कुंदन बन जाएगा

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