Skip to main content

खोजोगे तो मिल जाएंगे रघुपति राघव राजा राम((स्तुति स्नेह प्रेमचंद द्वारा राघव गाथा अंश))

खोजोगे तो मिल जाएंगे
 *रघुपति राघव राजा राम*
 रामशरण में आजा पगले,
*राम ही तीर्थ राम ही धाम*
खोजोगे तो मिल जाएंगे,
*रघुपति राघव राजा राम*

मन की आँखें खोल जरा तूं,
दिख जाएंगे प्यारे राम
राम की भगति में कितनी है शक्ति,
बतला देंगे तुझे हनुमान
खोजो गई तो मिल जाएंगे,
*रघुपति राघव राजा राम*

श्रद्धा होगी गर शबरी सी,
खुद चल कर आएंगे राम
झूठे बेरो को बड़े प्रेम से,
भोग लगाएंगे श्रीराम
जन्म सफल होगा शबरी सा, 
हो इस सत्य को,लो तुम जान
खोजोगे तो मिल जाएंगे,
*कौशल्या नंदन* प्यारे राम

*बजरंगी*सी होगी जो भगति, 
चित में नजर आएंगे राम
सिया सुधि लाए,संजीवनी लाए
भाई लखन के बचाए प्राण
स्मरण कराई जो शक्ति उनकी
*सागर लाँघ गए हनुमान*
खोजोगे तो मिल जाएंगे,
*रघुपति राघव राजा राम*

मर्यादा गर होगी चित में तो,
 लंका विजय कर देंगे राम
राम ही युक्ति,राम ही मुक्ति
*राम के दिल में बसे हनुमान*
राम ही दिल है राम ही धड़कन
राम करें तेरे पूरण काम
खोजोगे तो मिल जाएंगे,
*रघुपति राघव राजा राम*

भ्रातृ प्रेम हो गर लक्ष्मण सा,
सदा संग में रखेंगे तुझे राम

भाव रखेगा जो केवट सा चित में,
भव से तुझे तारेंगे राम
भेद भाव से हैं अति ऊपर
जन जन के अति प्यारे राम

त्याग करेगा जो गिद्धराज सा,
मुक्ति दिला देंगे श्री राम

शरण जो आएगा विभीषण सा राम की,शरणागत का सहारा बनेंगे राम

सोने की लंका दे देंगे पल में
ऐसे हैं मेरे श्री प्यारे राम
मित्रता निभाएगा जो सुग्रीव सी,
बाली वध करेंगे राम
अन्याय होगा जब भी इस जग में
शस्त्र उठा लेंगे श्री राम
खोजोगे तो मिल जाएंगे
दशरथ के लाडले प्यारे राम

प्रतीक्षा होगी गर सच्ची तो,
उद्धार अहिल्या सा कर देंगे राम
गलत आचरण जो भी करेगा,
संहार करेंगे उसका राम
खोजोगे तो मिल जाएंगे,
*भरत के प्यारे भाई राम*

मन के रावण को दूर भगा कर,
मन में बंधु जगा ले राम
रोज दिवाली होगी चित में,
ऐसा भगति का शुभ परिणाम
खोजोगे तो मिल जाएंगे
*शबरी के आराध्य प्यारे राम*

पुरुषार्थ की अमर सी गाथा हैं राम
भोग नहीं त्याग की ऐसी कथा है यह जिसमें सब पहले नंबर पर आते हैं
*मर्यादा की सच्ची कहानी*
*शौर्य की अमर दास्ताँ*
*पारिवारिक शुचिता की अमर गौरव गाथा*
सच में अमर है युगों युगों तक यह
*राघव गाथा*







Comments

Popular posts from this blog

वही मित्र है((विचार स्नेह प्रेमचंद द्वारा))

कह सकें हम जिनसे बातें दिल की, वही मित्र है। जो हमारे गुण और अवगुण दोनों से ही परिचित होते हैं, वही मित्र हैं। जहां औपचारिकता की कोई जरूरत नहीं होती,वहां मित्र हैं।। जाति, धर्म, रंगभेद, प्रांत, शहर,देश,आयु,हर सरहद से जो पार खड़े हैं वही मित्र हैं।। *कुछ कर दरगुजर कुछ कर दरकिनार* यही होता है सच्ची मित्रता का आधार।। मान है मित्रता,और है मनुहार। स्नेह है मित्रता,और है सच्चा दुलार। नाता नहीं बेशक ये खून का, पर है मित्रता अपनेपन का सार।। छोटी छोटी बातों का मित्र कभी बुरा नहीं मानते। क्योंकि कैसा है मित्र उनका, ये बखूबी हैं जानते।। मित्रता जरूरी नहीं एक जैसे व्यक्तित्व के लोगों में ही हो, कान्हा और सुदामा की मित्रता इसका सटीक उदाहरण है। राम और सुग्रीव की मित्रता भी विचारणीय है।। हर भाव जिससे हम साझा कर सकें और मन यह ना सोचें कि यह बताने से मित्र क्या सोचेगा?? वही मित्र है।। बाज़ औकात, मित्र हमारे भविष्य के बारे में भी हम से बेहतर जान लेते हैं। सबसे पहली मित्र,सबसे प्यारी मित्र मां होती है,किसी भी सच्चे और गहरे नाते की पहली शर्त मित्र होना है।। मित्र मजाक ज़रूर करते हैं,परंतु कटाक...

महिला(( नारी शक्ति पर बेहतरीन कविता स्नेह प्रेमचंद द्वारा))

मजबूत हौंसला,बुलंद इरादे, आज की महिला की यही पहचान दिल पर दस्तक,दिमाग में बसेरा चित में इसके पक्के निशान महिला ही तो देती है जन्म सृष्टि को सच में ईश्वर का धरा पर है वरदान अपनी जान पर खेल हमें जगत में लाने वाली के लिए बहुत छोटा है शब्द महान जीवन की डगर आसान नहीं किसी भी महिला की, संकल्प से सिद्धि तक के सफर में कितने ही आते हैं व्यवधान पर वो रुकती नहीं है,चलती रहती है बेशक जानती नहीं परिणाम  अपने ही पर्याय को उतार   धरा पर बेफिक्र सा हो गया भगवान खास नहीं अति खास मूढ में रहा होगा  विधाता,  जब नारी का किया होगा निर्माण आज कोई भी क्षेत्र नहीं अछूता नारी शक्ति से, हर क्षेत्र में नारी ने बना ली है पहचान दिल दिमाग में सामंजस्य बिठाना आता है नारी को, सदा ऋणी रहेगा नारी का ये जहान 

बुआ भतीजी