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चित्रकूट की शिला पे बैठे रोते भरत से बोले राम(( स्तुति स्नेह प्रेम चंद द्वारा राघव गाथा अंश))

चित्रकूट की शिला पे बैठे  रोते भरत से बोले राम इतने दुखी तुम  क्यों हो भाई??   कैसे आऊं तेरे काम___२ (कैसे करूं मैं तेरे काम) रुंधे कंठ से बोले भरत फिर *लांछन लाग्यो मुझ पर राम* किया नहीं था पाप जो मैंने भुगत रहा उसके परिणाम*****२ चित्रकूट की शिला पे बैठे रोते भरत से बोले राम देख सकूं न तुझे मैं रोते आऊँ कैसे तेरे काम???? बोले भरत फिर  रूंधे गले से मेरी कहानी सुन लो राम कैसे सुनाऊँ पाती दिल की चैन ना आए सुबह ओ शाम***२ छाया हटी भाई जब से तोरी  लागे मोहे घणा घना घाम   अवध के इस संकट का कारण  मुझे समझते भाई राम कैसे धोऊं इस पाप कलंक को हिवडा मेरा रहा ना जान****२ चित्रकूट की शिला पे बैठे रोते भरत से बोले राम सजल करो न नयन तुम्हारे____२ तुझ में बसते मेरे प्राण हृदय से लगाया भरत को राम ने धीरज देने का  कर गए काम सुनों भरत मेरे प्यारे भाई! देता तुझे हूं सच्चा ज्ञान सहेज के रखना,समेट के रखना जानू मैं,तू नहीं नादान धूल जमे गर दर्पण पर तो निर्मल चित न करे भुगतान  देखे ऊपर ऊपर से जग अंतर्मन की ना पहचान चित्रकूट की शिला पे बैठे रोते भरत से बो...

राम सा पुत्र भला कहां मिलेगा((स्तुति स्नेह प्रेमचंद द्वारा राघव गाथा अंश))

सत्यनिष्ठ दृढ़ प्रतिज्ञावान श्री राम (( स्तुति स्नेह प्रेमचंद द्वारा राघव गाथा अंश))

धूप धूप सी जिंदगी में छांव छांव से राम(( स्तुति स्नेह प्रेमचंद द्वारा राघव गाथा अंश))

मात पिता के अति दुलारे

*मात पिता के अति दुलारे* ऐसे थे श्री रघुराई प्राण जाएं पर वचन ना जाएं राम ने ऐसी रीत निभाई* *श्री राम की मात पिता भगति पूरे जग में आदर्श महान पितृज्ञपालक भी कहा गया है श्री राम को,सबसे सुंदर सपना राम* इसलिए महान नहीं हैं राम कि वे चक्रवर्ती राजा के पुत्र थे, बल्कि इसलिए महान हैं कि उन्होंने बूढ़े घायल वृद्ध जटायु का पुत्रवत अंतिम संस्कार कर,मुखाग्नि देने का किया था काम* *मान आज्ञा पिता की कर धारण वल्कल,वन को कर गए प्रस्थान* *संघर्षों भरा जीवन रहा श्री राम का हर चुनौती को अवसर बनाने का किया काम* *धूप धूप सी जिंदगी में छांव छांव से राम* कर्तव्यपथ पर चलते रहे आजीवन, ज़िम्मेदारियों को निभाते रहे श्री राम *स्नेह से पहले आता सम्मान है, सिखा गए हमें श्री राम मात पिता तो आजीवन रहे राम के लिए देहधारी भगवान* *पुरुषार्थ की,त्याग की,सत्य और नारी अस्मिता की अमिट कहानी है यह राघव गाथा,करती प्रेरणा भोर और शाम* *जब राम जो पता चलता है उन्हें 14 बरस का वनवास मिला है तो देखिए कैसी अद्भुत है उनकी प्रतिक्रिया मा! पिता ने मुझे जंगल का राज्य दे दिया है,बड़ी सफलताएं कर रही हैं मां मेरा वहां इंतजार,ऐसी उनकी सोच...

राम नाम ही चित को भाए