*मात पिता के अति दुलारे* ऐसे थे श्री रघुराई प्राण जाएं पर वचन ना जाएं राम ने ऐसी रीत निभाई* *श्री राम की मात पिता भगति पूरे जग में आदर्श महान पितृज्ञपालक भी कहा गया है श्री राम को,सबसे सुंदर सपना राम* इसलिए महान नहीं हैं राम कि वे चक्रवर्ती राजा के पुत्र थे, बल्कि इसलिए महान हैं कि उन्होंने बूढ़े घायल वृद्ध जटायु का पुत्रवत अंतिम संस्कार कर,मुखाग्नि देने का किया था काम* *मान आज्ञा पिता की कर धारण वल्कल,वन को कर गए प्रस्थान* *संघर्षों भरा जीवन रहा श्री राम का हर चुनौती को अवसर बनाने का किया काम* *धूप धूप सी जिंदगी में छांव छांव से राम* कर्तव्यपथ पर चलते रहे आजीवन, ज़िम्मेदारियों को निभाते रहे श्री राम *स्नेह से पहले आता सम्मान है, सिखा गए हमें श्री राम मात पिता तो आजीवन रहे राम के लिए देहधारी भगवान* *पुरुषार्थ की,त्याग की,सत्य और नारी अस्मिता की अमिट कहानी है यह राघव गाथा,करती प्रेरणा भोर और शाम* *जब राम जो पता चलता है उन्हें 14 बरस का वनवास मिला है तो देखिए कैसी अद्भुत है उनकी प्रतिक्रिया मा! पिता ने मुझे जंगल का राज्य दे दिया है,बड़ी सफलताएं कर रही हैं मां मेरा वहां इंतजार,ऐसी उनकी सोच...